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योगी सरकार का बड़ा फैसला, यूपी के साढ़े तीन लाख किसानों को मिलेंगे 177 करोड़, सीधे खाते में आएंगे रुपये

योगी सरकार ने पिछले दो वर्षों में आपदाओं से क्षतिग्रस्त फसलों के नुकसान के मुआवजे से छूटे किसानों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने किन्हीं तकनीकी कारणों से वित्तीय वर्ष 2021-22 और वर्ष...

Dinesh Rathourविशेष संवाददाता,लखनऊMon, 12 Feb 2024 09:05 PM
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योगी सरकार ने पिछले दो वर्षों में आपदाओं से क्षतिग्रस्त फसलों के नुकसान के मुआवजे से छूटे किसानों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने किन्हीं तकनीकी कारणों से वित्तीय वर्ष 2021-22 और वर्ष 2022-23 में मुआवजे से छूटे कुल 3.5 लाख से अधिक किसानों को एक अरब 76 करोड़ से अधिक धनराशि जल्द से जल्द खाते में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए हैं।

योगी के कड़े रुख पर हरकत में आए अधिकारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में विभिन्न आपदाओं से क्षतिग्रस्त हुई फसलों के मुआवजे और अन्य राहत को लेकर समीक्षा बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने त्रुटियों के कारण फसलों के नुकसान के दोबारा सत्यापन में लापरवाही और मुआवजा जारी नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए 17 जिलों के एडीएम एफआर से जवाब तलब किया था। साथ ही, अधिकारियों को ऐसे मामलों में तत्काल सत्यापन करा कर किसानों को मुआवजा राशि देने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। वर्तमान वित्तीय वर्ष में जनवरी तक 1,87,845 से अधिक किसानों को 80,88,68,299 रुपये से अधिक की सहायता धनराशि वितरित की जा चुकी है।

आधार, खाता संख्या गलत होने से छूट गए थे किसान

अपर मुख्य सचिव सुधीर गर्ग ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मुआवजे से छूटे किसानों को सहायता धनराशि देने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में दोबारा सर्वे कराया गया। सर्वे में पाया गया कि प्रदेश के वित्तीय वर्ष 2021-22 और वर्ष 2022-233 में कुल 3 लाख 76 हजार 287 किसान आपदाओं से क्षतिग्रस्त फसलों के मुआवजे से छूट गये थे। इसमें वित्तीय वर्ष 2021-22 के 2 लाख 27 हजार 735 किसान और वर्ष 2022-23 के एक लाख 48 हजार 552 किसान शामिल हैं। इस पर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों से छूटे किसानों को मुआवजा देने के लिए धनराशि की मांग करने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में, प्रदेश के सभी 75 जिलों से दोनों वित्तीय वर्ष के लिए कुल 176 करोड़ 96 लाख 63 हजार 245 रुपये की धनराशि की मांग की गई है। 

राहत आयुक्त जीएस नवीन ने बताया कि आपदाओं से क्षतिग्रस्त फसलों से प्रभावित बड़ी तादाद में किसानों के डाटा फिडिंग के दौरान आधार, खाता संख्या में गलती और डुप्लीकेसी के कारण मुआवजे का भुगतान नहीं हो पाता है। ऐसे में, दोबारा सत्यापन कराया जाता है, लेकिन जिलास्तर पर पिछले दो वर्षों में इसमें लापरवाही की गई, जिससे किसानों को मुआवजा जारी नहीं किया जा सका। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दोबारा सर्वे कराकर मुआवजे से वंचित किसानों को धनराशि हस्तातंरित की जा रही है।  वहीं, प्रदेश के विभिन्न जिलों से क्षतिग्रस्त फसलों से प्रभावित वंचित किसानों को तत्काल मुआवजा देने के लिए डिमांड के अनुसार धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। अभी तक पिछले दोनों वित्तीय वर्ष के छूटे किसानों को 60 करोड़ से अधिक की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। 

वंचित रह गए किसानों में सर्वाधिक सीतापुर, सिद्धार्थनगर के 

अपर मुख्य सचिव राजस्व के मुताबिक, सर्वे में पाया गया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में मुआवजे से सबसे अधिक सीतापुर के 27,836 किसान छूट गए थे, जिन्हें 10 करोड़ 72 लाख 51 हजार 397 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। दूसरे नंबर पर बरेली के 22,661 किसानों और तीसरे नंबर पर ललितपुर के 19,420 किसानों को मुआवजे का भुगतान किया जा रहा है। इसी तरह, वित्तीय वर्ष 2022-23 में मुआवजे से सबसे अधिक सिद्धार्थनगर के 21,002 किसान छूट गए थे, जिन्हें 10 करोड़ 7 लाख 53 हजार 392 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। वहीं, दूसरे नंबर पर झांसी के 17,296 किसानों और तीसरे नंबर पर बलरामपुर के 12,933 किसानों को मुआवजे का भुगतान किया जा रहा है। बाढ़, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से 33 प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त फसलों से प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाता है।  

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